सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Gita Verse 1.20-21: अर्जुन का शंखनाद और श्रीकृष्ण को आदेश | Translation in 5 Languages & Summary

✨ Shrimad Bhagavad Gita Series ✨
Chapter 1, Verse 20 & 21

॥ श्लोक - २० ॥

अथ व्यवस्थितार्न्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः ।
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥ २० ॥

🇮🇳 हिंदी: उस समय धनुष उठाकर, हनुमान जी के चिह्न वाली ध्वजा वाले अर्जुन ने राजा धृतराष्ट्र के पुत्रों को व्यूह में खड़ा देखा।

🚩 मराठी: त्यावेळी धनुष्य उचलून, रथावर हनुमानाचे निशाण असलेल्या अर्जुनाने धृतराष्ट्राच्या पुत्रांना युद्धासाठी सज्ज पाहिले.

🇵🇰 اردو: اس وقت ارجن نے، جس کے جھنڈے پر ہنومان کا نشان تھا، اپنا کمان اٹھایا اور دھرتراشٹرا کے بیٹوں کو جنگ کے لیے تیار دیکھا۔

🌵 राजस्थानी: हनुमान जी री ध्वजा वाळा अर्जुन आपरो गांडीव हाथ में लियो और धृतराष्ट्र रा बेट्यां ने लड़ाई री तैयारी में देख्या।

॥ श्लोक - २१ ॥

हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥ २१ ॥

🇮🇳 हिंदी: अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा— "हे अच्युत! कृपा करके मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच खड़ा करें।"

🚩 मराठी: अर्जुन श्रीकृष्णाला म्हणाला— "हे अच्युता! माझा रथ दोन्ही सैन्यांच्या मध्यभागी उभा करा."

🇵🇰 اردو: ارجن نے کرشنا سے کہا، "اے اچیوتا! براہ کرم میرا رتھ دونوں فوجوں کے درمیان کھڑا کر دیں۔"

🌵 राजस्थानी: अर्जुन श्रीकृष्ण जी ने बोल्या— "हे प्रभु! म्हारो रथ दोन्यां सेनावां रे बिचाळे ले जा'र खड़ो करो!"

📝 हिंदी व्याख्या (Summary):

इन श्लोकों में अर्जुन की युद्ध के प्रति सजगता दिखती है। 'कपिध्वज' होना विजय का संकेत है क्योंकि जहाँ हनुमान जी और श्रीकृष्ण हैं, वहाँ जीत निश्चित है। अर्जुन युद्ध शुरू होने से पहले यह देखना चाहते हैं कि उन्हें किनसे लड़ना है, इसलिए वे श्रीकृष्ण (हृषीकेश) को रथ बीच में ले जाने की आज्ञा देते हैं।

क्या आपको यह पसंद आया?

🙏 Support Sonki Thoughts

Donate via Razorpay ❤️

🙏 Gita Series by Sonki Thoughts

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

The Last Chapter: A Journey Beyond

" आख़िरी अध्याय " मै अपनी कहानी के आखिरी अध्याय में स्वयं को हर सामाजिक बंधन से मुक्त लिखना चाहूंगी.. जहां कोई नाम.. कोई पहचान.. कोई परछाई.. मेरे अस्तित्व को परिभाषित न करें! जहां मै, सिर्फ मै रहूं! जहां सपनों की कोई सीमाएं न हो.. मै चाहती हूं मेरा आख़िरी अध्याय ऐसा हो.. जहां मै ख़ुदको इंसान लिखूं बिना किसी संबोधन के... __sonia 📋 Copy Shayari SUPPORT MY JOURNEY BY @SONKITHOUGHTS

Ekant hi Sukh Hai - Deep Shayari by Sonu

शून्य से शिखर तक एकांत सुख हैं... एकांत दुःख है...!🫠🥀 एकांत में कुछ नही.... फिर भी एकांत सब कुछ है...!🫠🥀 __sonia 📋 COPY WORDS SUPPORT SONKI THOUGHTS EST. 2026 | @LAVKUSH

मैं अकिंचन, तुम महान: प्रेम का पूर्ण समर्पण

ये सोच के उसे छोड़ आया हूं... वो इतना प्यारा है मेरे साथ में बुरा लगेगा....🌼 मेरे साथ सिर्फ मेरे जैसे चलते हैं, वो उनकी भीड़ में जुदा लगेगा...🌼 किरदार वाकई बुरा है मेरा, वो मेरे साथ अच्छाई का खुदा लगेगा....🌼 वो सलीके से रहने वाला, मेरा रहन सहन उसे बेहूदा लगेगा....🌼 ~ 𝙨𝙤𝙣𝙪 @sonkithoughts SUPPORT MY THOUGHTS