लेखक:
Sonki Thoughts
" आख़िरी अध्याय "
मै अपनी कहानी के आखिरी अध्याय में स्वयं को हर सामाजिक बंधन से मुक्त लिखना चाहूंगी..
जहां कोई नाम.. कोई पहचान.. कोई परछाई..
मेरे अस्तित्व को परिभाषित न करें!
जहां मै, सिर्फ मै रहूं!
जहां सपनों की कोई सीमाएं न हो..
मै चाहती हूं मेरा आख़िरी अध्याय ऐसा हो..
जहां मै ख़ुदको इंसान लिखूं बिना किसी संबोधन के...
जहां कोई नाम.. कोई पहचान.. कोई परछाई..
मेरे अस्तित्व को परिभाषित न करें!
जहां मै, सिर्फ मै रहूं!
जहां सपनों की कोई सीमाएं न हो..
मै चाहती हूं मेरा आख़िरी अध्याय ऐसा हो..
जहां मै ख़ुदको इंसान लिखूं बिना किसी संबोधन के...
__sonia
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें