कर्म का विधान "जैसा बीज, वैसा फल — ब्रह्मांड का न्याय" "ब्रह्मांड में कुछ भी मुफ्त नहीं है और कुछ भी 'गलती' से नहीं होता। आपके द्वारा किया गया हर विचार, हर शब्द और हर कार्य एक बीज है जो वक्त आने पर फसल बनकर आपके सामने खड़ा होगा।" ⚖️ कर्म: कारण और प्रभाव (Cause & Effect) न्यूटन का तीसरा नियम कहता है— "हर क्रिया की एक समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।" कर्म का सिद्धांत इसी का आध्यात्मिक रूप है। यह कोई सजा या इनाम नहीं है, बल्कि एक **Feedback System** है जो आपको वही वापस देता है जो आपने ब्रह्मांड को दिया है। कर्म के तीन प्रकार 1. संचित कर्म (Sanchita): यह आपके पिछले जन्मों के कर्मों का विशाल गोदाम है। 2. प्रारब्ध कर्म (Prarabdha): संचित का वह हिस्सा जिसे आप इस जन्म में भुगतने के लिए लेकर आए हैं। इसे बदला नहीं जा सकता। 3. आगामी कर्म (Agami): वो कर्म जो आप ...