✨ Shrimad Bhagavad Gita Series ✨
Chapter 1, Verse 17 & 18
📺 श्लोक की सरल व्याख्या देखें:
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः || १७ ||
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते |
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् || १८ ||
📖 श्लोक १७ (Verse 17)
Hindi: श्रेष्ठ धनुष वाले काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, राजा विराट और अजेय सात्यकि ने अपने शंख बजाए।
English: The King of Kashi, the great archer; Shikhandi, the great chariot warrior; Dhrishtadyumna and Virata and the unconquered Satyaki.
Marathi: श्रेष्ठ धनुष्यधारी काशिराज, महारथी शिखंडी, धृष्टद्युम्न, राजा विराट आणि अजेय सात्यकी यांनी शंख फुंकले.
Rajasthani: मोटा धनुष वाला काशिराज, शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, राजा विराट और सात्यकि महाराज आप-आपरा शंख बजाया।
📖 श्लोक १८ (Verse 18)
Hindi: हे पृथ्वीपति! राजा द्रुपद, द्रौपदी के पाँचों पुत्र और महाबाहु अभिमन्यु ने भी चारों ओर से अपने-अपने शंख बजाए।
English: O Lord of Earth! Drupada, the sons of Draupadi, and the strong-armed son of Subhadra (Abhimanyu), all blew their separate conchshells.
Marathi: हे पृथ्वीपती! राजा द्रुपद, द्रौपदीचे पाचही पुत्र आणि महापराक्रमी अभिमन्यू या सर्वांनी आपापले शंख वाजवले.
Rajasthani: हे राजा! द्रुपद जी, द्रौपदी रा पांचूं टाबर और सुभद्रा रो लाडलो अभिमन्यु, सगळां जोर-शोर सूँ शंख फूँक्या।
🙏 Support Sonki Thoughts
Donate via Razorpay ❤️🙏 Gita Series by Sonki Thoughts

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें