अंत का सत्य
जिंदगी जला दी हमनें,
जैसे जलानी थी....
अब धुएं पर तमाशा कैसा?
और राख पर बहस कैसी?
जैसे जलानी थी....
अब धुएं पर तमाशा कैसा?
और राख पर बहस कैसी?
~अज्ञात 🌼
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
Labels:
Deep Thoughts
Life Truth
Sad Shayari
Zindagi
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें