आख़िरी अध्याय मै अपनी कहानी के आखिरी अध्याय में स्वयं को हर सामाजिक बंधन से मुक्त लिखना चाहूंगी.. जहां कोई नाम.. कोई पहचान.. कोई परछाई.. मेरे अस्तित्व को परिभाषित न करें! जहां मै, सिर्फ मै रहूं! जहां सपनों की कोई सीमाएं न हो.. जहां उड़ान की दिशा मै ख़ुद चुनूं.. जहां मेरे शब्द, मेरे जज़्बात... किसी रिश्ते या नियम की क़ैद में न हो! जहां मेरे हर फ़ैसले का आधार मेरा मन हो.. न कोई आलोचना.. न कोई अपेक्षा.. मै चाहती हूं मेरा आख़िरी अध्याय ऐसा हो.. जहां मै ख़ुदको इंसान लिखूं बिना किसी संबोधन के... __sonia अगर आपको मेरी रचनाएं पसंद आती हैं, तो आप मुझे सपोर्ट कर सकते हैं: Support My Work ❤️
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