सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

स्त्री और समाज: भावनाओं से देह तक

ना समझा जाता है...
ना जाना जाता है...
ना पढ़ा जाता है तुम्हारी भावनाओं को...

बस देख कर देह का व्यापार कर दिया जाता है...
दूसरी देह के साथ एक नई देह को जन्म देने के लिए...

लेकिन तुमसे उम्मीदें ज़रूर रखी जाती की..
तुम सुनो... तुम समझो.... तुम जानो....


अगर आपको ये विचार पसंद आए, तो आप मुझे सपोर्ट कर सकते हैं:

Support My Thoughts
— @sonkithoughts

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

The Last Chapter: A Journey Beyond

" आख़िरी अध्याय " मै अपनी कहानी के आखिरी अध्याय में स्वयं को हर सामाजिक बंधन से मुक्त लिखना चाहूंगी.. जहां कोई नाम.. कोई पहचान.. कोई परछाई.. मेरे अस्तित्व को परिभाषित न करें! जहां मै, सिर्फ मै रहूं! जहां सपनों की कोई सीमाएं न हो.. मै चाहती हूं मेरा आख़िरी अध्याय ऐसा हो.. जहां मै ख़ुदको इंसान लिखूं बिना किसी संबोधन के... __sonia 📋 Copy Shayari SUPPORT MY JOURNEY BY @SONKITHOUGHTS

Ekant hi Sukh Hai - Deep Shayari by Sonu

शून्य से शिखर तक एकांत सुख हैं... एकांत दुःख है...!🫠🥀 एकांत में कुछ नही.... फिर भी एकांत सब कुछ है...!🫠🥀 __sonia 📋 COPY WORDS SUPPORT SONKI THOUGHTS EST. 2026 | @LAVKUSH

मैं अकिंचन, तुम महान: प्रेम का पूर्ण समर्पण

ये सोच के उसे छोड़ आया हूं... वो इतना प्यारा है मेरे साथ में बुरा लगेगा....🌼 मेरे साथ सिर्फ मेरे जैसे चलते हैं, वो उनकी भीड़ में जुदा लगेगा...🌼 किरदार वाकई बुरा है मेरा, वो मेरे साथ अच्छाई का खुदा लगेगा....🌼 वो सलीके से रहने वाला, मेरा रहन सहन उसे बेहूदा लगेगा....🌼 ~ 𝙨𝙤𝙣𝙪 @sonkithoughts SUPPORT MY THOUGHTS