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एक उम्र के बाद हमें,
भागने से ज़्यादा...
कहीं रुकना अच्छा लगता है!
गति से ज़्यादा,
ठहराव प्रिय लगता हैं!
दुनिया घूमने से ज़्यादा
घर में रहना ज़रूरी लगता हैं!
किसी के आगे कहने से ज़्यादा,
चुप रहना ठीक लगता हैं!
बाहर के शोर से ज़्यादा,
भीतर का मौन सुनाई देता हैं!
चमक से ज़्यादा,
सरलता प्रभावित करती हैं!
अतः अंत में आकर्षण के बजाय,
प्रेम प्राथमिक लगने लगता हैं!
भागने से ज़्यादा...
कहीं रुकना अच्छा लगता है!
गति से ज़्यादा,
ठहराव प्रिय लगता हैं!
दुनिया घूमने से ज़्यादा
घर में रहना ज़रूरी लगता हैं!
किसी के आगे कहने से ज़्यादा,
चुप रहना ठीक लगता हैं!
बाहर के शोर से ज़्यादा,
भीतर का मौन सुनाई देता हैं!
चमक से ज़्यादा,
सरलता प्रभावित करती हैं!
अतः अंत में आकर्षण के बजाय,
प्रेम प्राथमिक लगने लगता हैं!
~अज्ञात
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