Spiritual Wisdom
The Triangle
Of Love
"स्वामी विवेकानंद के तीन कोण "
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विवेकानंद जी कहते हैं कि वास्तविक प्रेम एक त्रिकोण है। आइए इसे 'कोहबर की शर्त' (नदिया के पार) की महागाथा के उदाहरणों से समझते हैं।
प्रेम सौदा नहीं करता
"Love knows no bargain." सच्चा प्रेम बदले में कुछ नहीं माँगता।
Story Example: उनका एक प्रसिद्ध विचार है कि प्रेम हमेशा देने वाला होता है, लेने वाला नहीं। जो हाथ फैलाकर कुछ मांग रहा है, वह प्रेम नहीं कर रहा, वह याचना कर रहा है। उनके शब्दों में:
"प्रेम का अर्थ ही है त्याग। यदि आप बदले में कुछ चाहते हैं, तो आप प्रेम नहीं कर रहे, आप व्यापार कर रहे हैं।
"
प्रेम में भय नहीं होता
"Love knows no fear." डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता।
Story Example: सच्चे प्रेम में डर के लिए कोई जगह नहीं होती। विवेकानंद जी का मानना था कि हम अक्सर ईश्वर से भी डर के कारण प्रार्थना करते हैं (जैसे नरक का डर या सजा का डर)। उन्होंने कहा कि जब तक मन में भय है, तब तक "सौदा" चल रहा है। जिस दिन डर खत्म होगा, उसी दिन वास्तविक प्रेम शुरू होगा।
प्रेम स्वयं ही फल है
"Love knows no rival." प्रेमी के लिए उसका प्रेम ही सबसे बड़ा ईनाम है।
The Climax: विवेकानंद के अनुसार, प्रेम का फल खुद प्रेम ही है। जैसे हम ताजी हवा में सांस लेते हैं क्योंकि वह जरूरी है, वैसे ही आत्मा के लिए प्रेम जरूरी है। इसके लिए किसी स्वर्ग या इनाम की लालसा रखना प्रेम को अशुद्ध कर देता है।
सरल शब्दों में: विवेकानंद जी हमें सिखाते हैं कि प्रेम में 'स्वार्थ' का रत्ती भर भी स्थान नहीं होना चाहिए।
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