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Gita Saar Part 16: युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव के दिव्य शंख (Hindi, Rajasthani & Marathi Vyakhya)

✨ Shrimad Bhagavad Gita Series ✨
Chapter 1, Verse 16

📺 श्लोक की सरल व्याख्या देखें:

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अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ || १६ ||

🇮🇳 हिंदी अनुवाद:

कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने 'अनन्तविजय' शंख बजाया, और नकुल तथा सहदेव ने 'सुघोष' और 'मणिपुष्पक' शंख बजाए।

🇬🇧 English Translation:

King Yudhishthira, the son of Kunti, blew the conchshell named Anantavijaya; while Nakula and Sahadeva blew the Sughosha and Manipushpaka.

🚩 मराठी अनुवाद:

कुंतीपुत्र राजा युधिष्ठिराने 'अनंतविजय' शंख फुंकला, तर नकुल आणि सहदेवाने 'सुघोष' आणि 'मणिपुष्पक' शंख वाजवले।

📝 गीता सार (Hindi Summary)

इस श्लोक में बताया गया है कि पांडव सेना के अन्य योद्धाओं ने भी अपने विशेष शंखों का नाद किया। यह इस बात का प्रतीक है कि धर्म की रक्षा के लिए पूरी सेना एकमत और तैयार है।

🌵 राजस्थानी सार (Rajasthani)

देख भाई! राजा युधिष्ठिर 'अनन्तविजय' शंख बजायो और नकुल-सहदेव जी 'सुघोष' और 'मणिपुष्पक' शंख फूँक्या। पांडवां री फौज एकदम डाकी तैयार खड़ी है!

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