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Gita Saar Chapter 1, Verse 23: दुर्योधन के समर्थकों का निरीक्षण | Translation & Detailed Summary

✨ Shrimad Bhagavad Gita Series ✨
Chapter 1, Verse 23

📺 श्लोक की सरल व्याख्या देखें:

योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः |
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः || २३ ||

🇮🇳 हिंदी अनुवाद:

दुर्बुद्धि दुर्योधन का युद्ध में प्रिय करने की इच्छा वाले जो-जो ये राजा लोग इस सेना में आए हैं, उन युद्ध करने वालों को मैं देखूँगा। [00:00:24]

🚩 मराठी अनुवाद:

दुष्ट बुद्धीच्या दुर्योधनाचे कल्याण करण्याच्या इच्छेने जे योद्धे येथे जमले आहेत, त्यांना मी युद्ध सुरू होण्यापूर्वी पाहू इच्छितो।

🌵 राजस्थानी सार:

ओ खोटी बुद्धि वाळो दुर्योधन जका लोगां ने म्हारें सामी लड़वा ताईं भेळा करिया है, मने अणां सगळां ने एक बार आछी तऱ्यान देखणो है।

🇵🇰 اردو ترجمہ:

میں ان لوگوں کو دیکھنا چاہتا ہوں جو بدعنوان مائنڈڈ (دُربدھی) دُریودھن کی حمایت کرنے اور اس کی خوشی کے لیے یہاں لڑنے آئے ہیں۔

🇬🇧 English Translation:

I desire to see those who have gathered here to fight, wishing to please the evil-minded son of Dhritarashtra (Duryodhana) in this battle.

📝 हिंदी व्याख्या (Summary):

इस श्लोक में अर्जुन दुर्योधन को 'दुर्बुद्धि' (खराब बुद्धि वाला) कहकर संबोधित करते हैं। अर्जुन जानते थे कि यह युद्ध दुर्योधन के अहंकार और हठ के कारण हो रहा है। वे यह देखना चाहते थे कि कौन-कौन से राजा अपनी नैतिकता को भूलकर केवल दुर्योधन को खुश करने के लिए अधर्म के साथ खड़े हुए हैं। यह श्लोक हमें सिखाता है कि युद्ध में केवल शक्ति नहीं, बल्कि सामने वाले की मानसिकता को समझना भी जरूरी है। [00:00:40]

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