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Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 27 | Shlok 27 Hindi, Rajasthani, Marathi & Urdu Translation

अध्याय 1 • श्लोक 27

श्रीमद्भगवद्गीता

तानसमीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् |
परया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् || 27 ||

🇮🇳 Hindi:

कुन्तीपुत्र अर्जुन ने जब उन सभी मित्रों और संबंधियों को वहां उपस्थित देखा, तो वे अत्यंत करुणा से भर गए और दुखी होकर यह वचन बोले।

🚩 Rajasthani:

जद कुन्ती पुत्र अर्जुन आपरा सगळा सग-संबंधियां ने युद्ध के मैदान में खड्या देख्या, तो वो घणो दुखी होग्यो और म्हारो जीव भर आयो, फेर वो आ बात बोल्यो।

🕉️ Marathi:

जेव्हा कुंतीपुत्र अर्जुनाने त्या सर्व मित्रांना आणि नातेवाईकांना तिथे उपस्थित पाहिले, तेव्हा तो अत्यंत करुणेने भरून गेला आणि दुःखी होऊन असे म्हणाला।

🖋️ Urdu:

جب کنتی کے بیٹے ارجن نے اپنے تمام دوستوں اور رشتہ داروں کو وہاں موجود دیکھا تو وہ انتہائی غمگین ہو گئے اور دکھ کے ساتھ یہ الفاظ کہے۔




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