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मर्यादा, प्रेम और पश्चाताप: पढ़िए 'गुनाहों का देवता' के 10 सबसे शक्तिशाली संवाद (Top 10 Quotes)

अमर संवाद

TOP 10 TIMELESS QUOTES

#01

"मर्यादा जब प्रेम का गला घोंटने लगे, तो वह मर्यादा नहीं रहती, वह एक गुनाह बन जाती है।"

#02

"चन्दर भाई, क्या आपकी इन भारी-भरकम किताबों में कहीं यह लिखा है कि किसी की रूह को मारकर देवता बना जा सकता है?"

#03

"सुधा, मैंने देवता बनने के लिए तुम्हें मिट्टी में मिला दिया, पर आज समझ आया कि मैं देवता नहीं, सबसे नीच इंसान निकला।"

#04

"तुम मेरे लिए कोई साधारण लड़की नहीं हो सुधा, तुम मेरी तपस्या का फल हो। और मैं अपनी तपस्या को वासना की आग में नहीं जलाना चाहता।"

#05

"तुम गुनहगार हो चन्दर! क्योंकि तुमने अपनी पवित्रता बचाने के लिए एक मासूम की बलि दे दी। तुम देवता नहीं, तुम डरपोक हो!"

#06

"इलाहाबाद का नगर-देवता जरूर कोई रोमैण्टिक कलाकार है, जिसने यहाँ की सुबहों को मलयजी, दोपहरों को अंगारी और शामों को रेशमी बनाया है।"

#07

"तुम देवता हो चन्दर! और मैं? मैं सिर्फ एक तुच्छ नारी हूँ जो तुम्हारे चरणों की धूल बनना चाहती थी, पर तुमने मुझे आकाश का तारा बना दिया जहाँ से मैं तुम्हें छू भी नहीं सकती।"

#08

"जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हम जिनसे प्रेम करते हैं, उन्हें ही सबसे ज्यादा दु:ख देते हैं।"

#09

"राख ले जाएगी अभागी! इसे बह जाने दे... लहरों में राख एक ज़हरीले साँप की तरह जा रही थी, जैसे चन्दर के सारे अरमान बह रहे हों।"

#10

"मैंने जिसे पवित्रता समझा, वह असल में मेरा अहंकार था। सुधा चली गई और अपने साथ मेरी आत्मा भी ले गई।"

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